Thursday, November 6, 2025

साइबर आतंकवाद

 


डाॅ. दिनेश कुमार गुप्ता

असि. प्रोफेसर

रक्षा एवं सामरिक अध्ययन विभागदयानन्द वैदिक काॅलेजउरईजालौन उत्तर प्रदेश- 285001



सारांश

डिजीटल आतंकवाद मानव, समाज, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय दृष्टि एवं फलक के लिहाज से एक गंभीर समस्या बन कर उभरा है। जिसने युद्ध के चिंतन एवं चरित्र को तेजी से बदलने में सक्षमता हासिल की। थल, जल, वायु एवं अन्तरिक्ष का अब ऐसा कोई भी क्षेत्र अभेद्य नहीं रहा। नित विकसित एवं उन्नत होती संचार तकनीकी के सजग एवं सफल उपयोग का इकोसिस्टमअपराध एवं युद्ध के समग्र इकोसिस्टमको पुनर्भाषित एवं  पुनर्विवेचित करने हेतु जहां एक तरफ विवश किया, वहीं दूसरी तरफ प्रोद्योगिकी के हस्तक्षेप स्वरूप सस्ता, कम कीमत, तीव्रता, फैलाव एवं द्रुतगति आदि विशेषताओं ने आकर्षित भी कर रखा है। ऐसे में साइबर आतंकवाद नूतन चुनौतियों एवं खतरों के माध्यम से दस्तक दे चुका है। जो मानव ही नहीं अपितु राष्ट्रों के आर्थिक, राजनैतिक, रणनीतिक, सामाजिक एवं सामरिक ताने बाने को ध्वस्त कर रहा है। फलतः व्यवस्थ के हरेक क्षेत्र में ई-गर्वनेंस एवं साइबर आर्मी आदि उपागमों क्षरा साइबर आतंकवाद के खतरनाक मंसूबों को नेस्तनाबूद हेतु जरूरी संसाधनों एवं संस्थानों का संस्थापन सुनिश्चित किया जा रहा है।

बीज शब्द- डिजीटल, साइबर, इकोसिस्टम, अपराध, आतंक

 

 

सूचना और संचार प्रोद्योगिकी के लिए उन्नत एवं विकसित होते हुए, संस्करण जितना मावन एवं उसके दैनंदिन जीवन को सहज, सरल व सक्षम निर्मित करने में सर्वसुलभता का पर्याय बन चुके हैं उतना ही दुरुपयोग के तमाम पहलू भी उजागर हो चुके हैं। जब यह नकारात्मकता समाज और राष्ट्र को गंभीरता से प्रभावित करने लगे तब स्थिति भयावह हो जाती है। साइबर आतंकवाद अद्यतन मानव सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा एवं राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। साइबर आतंकवाद जिसे डिजिटल आतंकवाद के रूप में भी संज्ञान लिया जाता है आतंकवादी संघटनों द्वारा सूचना एवं संचार प्रणालियों के विरुद्ध विघटनकारी हमलों के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसका मुख्य उद्देश्य संचार उपकरणों के माध्यम से संचार प्रणाली में मनोवांछित भौतिक व्यवधान उत्पन्न करते हुए चेतावनी, दहशत या आतंक उत्पन्न किया जाता है।

21वीं सदी के इस कम्प्यूटरीकृत युग में जहां नवाचार मानव, समाज व राष्ट्र के जीवन के हरेक भाग को संतृप्त कर रहा है; वहीं डिजीटल वाॅर एक बहुत बड़ा खतरा बनकर उभरा है। दरअसल डिजीटल आतंकवाद अवैधानिक रूप से दहशत एवं हिंसा के कृत्यों को अंजाम देने के लिये आॅनलाइन तरीकों एवं रणनीतियों का मनोवांछित उपयोग है।

डिजीटल आतंकवाद, आतंकवाद का एक ऐसा रूप है जिसमें राजनैतिक, वैचारिक एवं सार्वजनिक विश्वासों से प्रेरित होते हुए आई.सी.टी. का उपयोग करते हुए गोपनीय जानकारी हासिल करना, शारीरिक क्षति, धमकी, चेतावनी व आतंक फैलाना सम्मिलित होता है।

यद्यपि साइबर आतंकवाद की वैश्विक रूप में मान्यता प्राप्त परिभाषा का सृजन नहीं हुआ है। साइबर आतंकवाद शब्द 1980 के मध्य में  सुरक्षा एवं खुफिया संस्थान, कैलीफोर्निया के बैरी सी कोलिन ने दिया।

इन्टरनेशनल टेलीकम्यूनिकेशन यूनियन के अनुसार, साइबर आतंकवाद उपकरणों, नीतियों, सुरक्षा संकल्पनाओं, सुरक्षा बचाव, दिशानिर्देश, खतरा प्रबंधन उपागम, कार्य, प्रशिक्षण, सर्वोत्तम प्रथाएं, आश्वासन और प्रोद्योगिकी का सम्मिलित रूप से साइबर वातावरण एवं संबंधित संगठनों के मद्देनज़र उपयोगकर्ता के हित में सुरक्षा प्रदान करते हुए विरुद्ध साइबर वातावरण एवं संगठन प्रणाली आदि को ध्वस्त करना है।

साइबर आतंकवाद असीम यानी बिना सीमा के है। यह स्थल, जल, वायु एवं वाह्य अंतरिक्ष में कहीं भी हो सकता है। इसका क्षेत्र दरअसल साइबर स्पेस है जो गतिशील, त्वरित, विस्तृत एवं आभासी है। जिसमें सोशल मीडिया, वेबसाइट एवं आनलाइन आभासी समुदाय सम्मिलित है।

साइबर आतंकवाद क्यों? दरअसल साइबर आतंकवादी विभिन्न लाभों के दृष्टिगत निम्नलिखित साइबर हमलों की विधियों का प्राथमिकता से उपयेाग करते हैं-

(1) यह परम्परागत विधियों से सस्ता है।

(2) स्वयं की पहुँच, पहचान एवं भौगोलिक स्थिति छिपाया जा सकता है।

(3) विभिन्न साइबर आतंकी गतिविधियों का स्रोत खोजना बेहद कठिन है।

(4) किसी भी तरह की भौतिक बाधा अथवा पारगमन जाँच केन्द्रों से मुक्त।

(5) विश्व में कहीं भी किसी भी गतिविधि को रिमोट द्वारा संचालित किया जा सकता है।

(6) एक साथ एक ही समय में बड़ी संख्या में हमले को विभिन्न तरीकों से अंजाम दिया जा सकता है।

(7) सम्बंधित देश और दुनिया में बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित किया जा सकता है।

(8) साइबर आतंकवाद का सीमा हीनता से मुक्त होना।

(9) गुमनामी की प्रकृति से मुक्त होना।

(10) रक्षात्मक एवं आक्रमणात्मक दोनों सहज एवं त्वरित पहुँच में होना।

(11) शासन के विभिन्न तरीकों एवं अन्तर्राष्ट्रीय अभेद्यता की उभय स्थिति होने के कारण आरजकता एवं आतंक का वातावरण बनाए रखना।

साइबर आतंकवाद के प्रकार- आई. सी. टी. के नित उन्नतीकरण एवं विकास के कारण साइबर आतंकवाद को विभिन्न रूपों में वर्गीकृत किया जा सकता है जो निम्नवत हैं-

- स्पाइवेयर/ एडवेयर- यह एक तरह का दुर्भावनापूर्ण साफ्टवेयर है जिसे कम्प्यूटर से इंस्टाल कर उपयोगकर्ता की निजी जानकारी चुराकर किसी तीसरे पक्ष को भेजना सम्मिलित होता है।

- संचार प्रोद्योगिकी का बर्बरता के रूप में उपयोग करना- यह एक ऐसी कार्रवाई है जिसमें सार्वजनिक अथवा निजी संपत्ति को जानबूझकर नष्ट किया जाता है।

- प्रचार- यह एक ऐसी कार्रवाई है जिसमें एक बड़े समुदाय को वांछित लक्ष्य के दृष्टिगत सूचनाओं की प्रवाह प्रक्रिया को बाधा रहित अंजाम दिया जाता है ताकि लोगों के मतों एवं विश्वास प्रणाली को परिवर्तित किया जा सके। आतंकी संगठनों के लये यह एक शक्तिशाली भर्ती उपकरण है। ताकि लक्षित लोगों के समुदाय को स्वहित में उपयोग किया जा सके।

- सेवा से वंचित करना हमला- इसके तहत किसी लक्षित सर्वर के सामान्य कामकाज का दुर्भावनापूर्ण प्रयास है जो इसे अवैध अनुरोधों से भर देता है। ताकि संचार प्रक्रिया का मक़सद ध्वस्त हो सके।

- नागरिक और सैन्य ढांचों के विरूद्ध नेटवर्क आधारित हमला।

- नागरिक और सैन्य ढाँचों के विरूद्ध गैर नेटवर्क आधारित हमला।

- एल्टेरिंग वायरस- यह एक ऐसा वायरस है जो कम्प्यूटर में इंस्टाल साफ्टवेयर को प्रभावित करता है। सैन्य संस्थानों के दृष्टिगत अत्यंत खतरनाक हस्तक्षेपी कमांड है।

साइबर हमलों के प्रकार:-

साइबर आतंकवाद का प्रमुख हथियार कम्प्यूटर वायरस और वार्म हैं। साइबर आतंकी गतिविधियों निमित्त कम्प्यूटर ढांचों को निम्न विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है-

(1) भौतिक हमले।

(2) सिन्टैक्टिक हमले।

(3) सिमैन्टिक हमले।

(4) कम्प्यूटर नेटवर्क हमले।

(5) सामाजिक नेटवर्किंग आधारित हमले।

(6) रेडियो, जी.पी.एस और वायरलेस नेटवर्क पर हमलें।

(7) रेडियो फ्रिक्योन्सीज को ध्वस्त करना।

 

साइबर हमले के उपकरण

साइबर आतंकवादी निम्नलिखित उपकरणों एवं विधियों का अधिकतर उपयोग करते हैं-

- हैकिंग

- टार्जन्स

- कम्प्यूटर वायरस

- ईमेल संबंधित अपराध

- सेवाओं का अस्वीकरण

- क्रिप्टोग्राफी

- आइसफाग/ हिट एंड रन/ साइबर मरसेनरीज

 

साइबर आतंकवाद से भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा

यद्यपि भारत आई.टी. क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है एवं ई-सुशासन के एक नये दौर में दस्तक दे चुका है। ई-सुशासन के विभिन्न क्षेत्रों जैसे- आयकर, पासपोर्ट, वीज़ा, स्टाक एक्सचेंज, पुलिस, न्यायालय, रेलवे, रोडवे, एअर लाइन आरक्षण, ई-टिकटिंग, ई-बैंकिंग, ई-काॅमर्स, ई-फाइनान्स इत्यादि एवं नये उभरते हुए क्षेत्रों में साइबर आतंक की गतिविधियां सामान्य सुशासन एवं राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से महत्त्वपूर्ण चुनौतियों के रूप में विद्यमानता हो रही है। अद्यतन इस तरह के खतरों से निपटने निमित्त केन्द्रित तकनीकी कानूनी किसी भी तरह की सार्वजनिक नीति का अभाव है। सूचना तकनीक अधिनियम, 2000 पर्याप्त नहीं है। भारतीय सैन्य प्रतिष्ठान/ संस्थान के अधिकार संवेदनशील सुरक्षा उपकरण कम्प्यूटराइज्ड हो चुके हैं। साइबर आर्मी की अवधारणा त्वरित ज़मीनीकृत हो रही है। ऐसे में साइबर आतंकवाद के खतरों का प्रबंधन चिंता, चिंतन एवं निपटने के त्वरित उपायों का विषय बन चुका है। ऐसे में ज़रूरी है कि अतिकेन्द्रित तकनीकी कानूनी समेकित मज़बूत नीति होनी चाहिये। उपयुक्त साइबर सुरक्षा नीति और उपयुक्त भारत केन्द्रित साइबर अपराध निवारण नीति का निर्माण साइबर आतंकवाद से निपटने हेतु महत्त्वपूर्ण होता जा रहा है।

 

साइबर आतंक के प्रबंधन एवं साइबर नीति हेतु रणनीति

- उत्तम मानकों का प्रोत्साहन।

- सुरक्षित वातावरण का सृजन।

- आपूर्ति शृंखला खतरों का न्यूनीकरण।

- साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रमों का निर्माण।

- लोक-निजीकरण सहभागिता का प्रभावी विकास।

- ई-सुशासन सेवाओं की सुरक्षा।

- आश्वासन ढाँचे का सृजन।

- नियंत्रण नियामक ढाँचों का मज़बूतीकरण।

- साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहन एवं उन्नतीकरण।

- प्राथमिकतापरक उपायों का क्रियान्वयन।

- निर्मित नीतियों का मज़बूत संचालन।

- औपचारिक एवं अनौपचारिक क्षेत्रों में राष्ट्र की साइबर सुरक्षा ज़रूरतों एवं क्षमता संवर्धन हेतु शिक्षा एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों द्वारा मानव संसाधन विकास।

- सूचना साझाकरण एवं सहयोग के दृष्टिगत साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में अन्य देशों के साथ उभयपक्षीय या बहुपक्षीय सम्बंधों या संधियों का विकास।

 

सन्दर्भ-

(1) आई. डी0 एस00 टास्कफोर्स रिपोर्ट, 2012, इंडियाज़ साइबर सिक्योरिटी चैलेन्ज, नई दिल्ली।

(2) विदेश मन्त्रालय, 2013, इंडिया-यूएस रिलेशन, भारत सरकार, नई दिल्ली।

(3) कोलिन बैरी, 1997, दफ्यूचर आॅफ साइबर टेरेरिज़म क्राइम एंड जस्टिस इंटनेशल, टवस.13ए अंक-2

(4) सूचना प्रोद्योगिकी एक्ट, 2000

(5) राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति, 2013

(6) त्यागी, आशुतोष, इंडियन साइबर सिक्योरिटी-थ्रेट एंड जाॅब, 2013

(7) सेनगुप्ता, एस., ए होममेड़ ड्रोन स्नूप्स आन वायरलेस नेटवर्क, द न्यू पार्क टाइम्स, 13 फरवरी, 2011


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